Home विज्ञान क्या आसमानी बिजली को स्टोर किया जा सकता है

क्या आसमानी बिजली को स्टोर किया जा सकता है

जब कभी जोर से बिजली गरजती है तो हम में से कुछ लोग जरूर ही सहम जाते हैं. दरअसल बिजली के चमकने या जमीन पर गिरने का साइंस यह है कि बादलों में जब पॉजिटिव और नेगेटिव चार्ज एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तो बिजली का चमकना हमें दिखाई देता है. वहीं बादलों के निचले हिस्से में जब नेगेटिव चार्ज जमीन पर किसी पॉजिटिव चार्ज की तरफ अट्रेक्ट होते हैं तो बिजली जमीन पर गिरती है.

सालभर में कितना चमकती हैं बिजली

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 1 साल में लगभग अनुमानित 1 अरब 40 करोड़ बार बिजली चमकती हैं जिसमे से 25% बिजली तो जमीन पर गिरती है और 75% बिजली बादलों के बीच में ही चमकती रहती है यानी कुल 35 करोड़ बार जमीन पर आसमानी बिजली गिरती है 1 साल में. और आपको बताते चलें कि एक लाइटनिंग स्ट्राइक में 5 अरब जूल की एनर्जी होती है, जितना 145 लीटर पेट्रोल में होता है. एक अनुमान के मुताबिक एक लाइटनिंग स्ट्राइक में लगभग 250 किलो वाट ऑवर की power होती है. देखा जाए तो यह बहुत ज्यादा एनर्जी तो नहीं है. पर एनर्जी तो लिमिटेड है इसलिए जितना हो सके उतना ज्यादा इसे स्टोर किया जाए. माना जाए कि भारत का एक घर एवरेज 800 किलोवाट आवर बिजली यूज करता है 1 महीने में, तो भी एक लाइटनिंग स्ट्राइक 1 महीने के लिए भी एक घर को बिजली नहीं दे सकता. पर अगर हम किसी तरह से आसमानी बिजली को स्टोर कर सके. तो हम बिजली के कमी को कुछ हद तक तो जरूर दूर कर सकेंगे. क्योंकि पृथ्वी पर हर सेकेंड सौ बार लाइटनिंग स्ट्राइक तो होती ही रहती है. और वैज्ञानिक बताते हैं लाइटनिंग स्ट्राइक ग्लोबल वार्मिंग के कारण 50% तक बढ़ चुका है. तो क्या हम आसमानी बिजली को स्टोर कर सकते हैं अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए.

तो क्या हम स्टोर कर सकते हैं आसमानी बिजली

सीधे शब्दों में कहें तो आने वाले कुछ सालों तक तो नहीं. इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा मनुष्य कर नहीं सकता है. लेकिन लाइटनिंग को हार्नेस करने के लिए जितने रिसोर्सेज लगेंगे उसे खर्च करके इतनी कम अमाउंट में एनर्जी स्टोर करना एक इलॉजिकल और इंप्रैक्टिकल सी बात है. दरअसल रिसर्च बताते हैं कि लाइटनिंग स्ट्राइक जमीन के किस हिस्से में होगा यह निश्चित नहीं है. इसलिए जमीन पर लाइटनिंग को कैप्चर करने के लिए जमीन पर बहुत सारे टावर लगाने पड़ेंगे, इतने टावर की एक particular एरिया टावर से ही भर जाए. और ये  जमीन का बहुत ही ज्यादा हिस्सा लेगा पूरी तरीके से इस को बैठाने के लिए. जिसमें बहुत ज्यादा खर्चा होगा और यह बात इंप्रैक्टिकल सी बात है. लेकिन अच्छी खबर भी है इस विषय में, जो कि वैज्ञानिकों ने बताया है हाल ही के रिसर्च में.

लेज़र बीम से कर सकते हैं बिजली को कण्ट्रोल

मनुष्य कुछ हद तक बिजली चमकने को कंट्रोल कर सकता है और अभी मनुष्य इस पर शुरुआती स्टेज पर है. जो चीज लाइटनिंग को कंट्रोल कर सकती है वह है…. लेजर बीम. दरअसल वैज्ञानिक बताते हैं कि बादलों के बीच लेजर बीम स्ट्राइक करने से यह आसपास के क्षेत्र की हवा को ionized कर देते हैं. जिससे इलेक्ट्रिकल चार्ज  उस ionized path को फॉलो करने लगता है. इससे यह संभव हो सकता है कि बिजली कहां चमकेगी इसका path मनुष्य इस पर और ज्यादा अध्ययन कर इसे कंट्रोल कर सकता है. तो आसमानी बिजली को स्टोर करने का आईडिया इतना बुरा भी नहीं है, बस इसमें उम्मीद से कम पावर होता है और फिलहाल तो मनुष्य इसे स्टोर कर पाने में सक्षम नहीं है.

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