अंतरिक्ष क्या है – what is space in hindi

आपने एक शब्द सुना है, अंतरिक्ष… सुना ही होगा क्योंकि यह एक ऐसा शब्द है जिसको लोग ब्रह्मांड से तुलना करने लगते हैं. पर अंतरिक्ष और ब्रह्मांड में थोड़ा अंतर है. वह हम बाद में जान लेंगे।

लेकिन पहले हमें यह जानना है कि आखिरी अंतरिक्ष होता क्या जो हम बार-बार सुनते आ रहे हैं. अगर हम अंतरिक्ष का मतलब समझ नहीं पाएंगे तो हम कभी भी सही सही किसी भी चीज का अनुमान भी नहीं लगा सकते अंतरिक्ष के मामले को जानने में.

तो चलिए बिना समय गवाएं पहले यह जानते हैं कि अंतरिक्ष क्या है…

अंतरिक्ष क्या है –

अंतरिक्ष उसे कहते हैं जो हमारे पृथ्वी से दूर वह आकाशीय क्षेत्र है जहां पर सभी खगोल पिंड सभी के सभी ग्रह और तारे मौजूद है. यहां आकाशीय क्षेत्र से मतलब खाली स्थान से है, आकाश का मतलब खाली स्थान होता है.

जैसा कि मैंने आपको बताया कि आकाश मतलब खाली स्थान होता है पर अंतरिक्ष पूरी तरीके से खाली जगह नहीं है. यहां पर कुछ कम घनत्व के गैस पार्टिकल मौजूद हैं, जैसे हाइड्रोजन और हीलियम के कण.

साथ ही साथ इन खाली जगह यानी अंतरिक्ष में डार्क मैटर और डार्क एनर्जी भी फैली हुई है, जो ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य है.

अंतरिक्ष क्या है

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अंतरिक्ष तीन दिशाओं यानि 3डी माना जाता है. यानि अंतरिक्ष लम्बाई, चौड़ाई, ऊंचाई तीनो दिशाओं में फैला हुआ हैं. पर आधुनिक वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष 11 दिशाओं से युक्त है. जिसमें से चौथी दिशा space-time यानी समय है.

माना जाता है कि इस अंतरिक्ष का टेंपरेचर भी वैज्ञानिकों ने नाप लिया है. जो कि 2.7 केल्विन है यानी -270 डिग्री सेल्सियस। माना जाता है कि यह ब्रह्मांड के निर्माण समय से निकलने वाले बैकग्राउंड रेडिएशन को नाप कर अंतरिक्ष का तापमान नापा आ गया है.

अंतरिक्ष का जन्म कैसे हुआ –

माना जाता है कि आज से 13.8 साल पहले एक छोटे से बिंदु में बहुत बड़ा विस्फोट हुआ जिससे बिग बैंग के नाम से जानते हैं. यही वह बिग बैंग था जिसके कारण से पूरे ब्रह्मांड का निर्माण हुआ, समय का निर्माण हुआ, स्पेस का निर्माण हुआ, ग्रहों का निर्माण हुआ, तारों का निर्माण इन सब का निर्माण बिग बंग से ही हुआ है.

और यह बिग बैंग का विस्फोट लगातार फैलता ही जा रहा है, अपने पीछे कुछ बैकग्राउंड रेडिएशन को छोड़ते हुए. माना जाता है कि यह ब्रह्मांड प्रकाश की रफ्तार से भी तेजी से फैलता जा रहा है, यानी अंतरिक्ष भी फैल रहा है.

माना जाता है कि बिग बैंग के विस्फोट के बाद ब्रह्मांड लगभग 3,80,000 साल बाद ठंडा होना शुरू हो गया था और उसी के बाद से ही इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन जब इतने ठंडे हो गए तो आपस में फ्यूज होने के योग्य भी हो गए.

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और जब इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन का फ्यूज होना शुरू कर दिया। तब वह हाइड्रोजन एटम का निर्माण भी शुरू हो गया और यहीं से अंतरिक्ष के निर्माण की कहानी भी शुरू होती है.

यहां आपको यह ध्यान देना है कि अंतरिक्ष और ब्रह्मांड में अंतर है. ब्रह्मांड वह तत्व है जो अंतरिक्ष को भी धारण किए हुए हैं यानि ब्रह्मांड में सब कुछ आता है और अंतरिक्ष हमारे पृथ्वी के वायुमंडल से लगभग 100 किलोमीटर की ऊंचाई से शुरू होता है.

पृथ्वी के 100 किलोमीटर के ऊंचाई वाले लाइन को karman line कहा जाता है और यहीं से अंतरिक्ष की शुरुआत होता है.

मनुष्य और अंतरिक्ष –

हम मानव का शरीर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के साथ जीवित रहने के लिए बना है. अगर हमारे ऊपर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटी ना लगे तो हम वेटलेसनेस महसूस करेंगे. जो कि हमारे शरीर के लिए अच्छा नहीं है बिल्कुल भी.

क्योंकि हम उस तरह के एनवायरनमेंट में रहने के लिए बने ही नहीं हुए हैं. लेकिन जैसे ही एक मनुष्य अंतरिक्ष में जाता है उसके ऊपर थोड़ा सा भी ग्रेविटी बल नहीं लगता है.

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जिसके कारण होता यह है कि बहुत ज्यादा समय तक लगभग एक 2 महीने तक या कहीं कुछ दिनों तक अंतरिक्ष में वेटलेसनेस के साथ रहना मनुष्य के शरीर में मसल एट्रोफी यानी मांस पेशियों का घटना शुरू हो जाएगा।

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धीरे-धीरे मनुष्य का हड्डी भी कमजोर हो जाना शुरू हो जाता है. जिसके वजह से व्यक्ति में रेड ब्लड सेल का बनना कम हो जाता है और व्यक्ति के अंदर कार्डियोवैस्कुलर डिजीज यानि दिल की बीमारियां होना भी शुरू हो जाता है.

बस इतना काफी है किसी को मौत के घाट उतारने के लिए इसलिए अंतरिक्ष मनुष्य के रहने लायक एनवायरनमेंट नहीं है.

interspaces का वर्णन –

यहां पर स्पेशल अंतरिक्ष को 3 तरीके से देखा जा सकता है. इंटरस्टेलर स्पेस, इंटरगैलेक्टिक स्पेस, इंटरप्लेनेटरी स्पेस

इंटरप्लेनेटरी स्पेस सूर्य और ग्रहों के बीच का क्षेत्र होता है, यानी तारों और उनके ग्रहों के बीच के क्षेत्रों को इन्हीं क्षेत्रों में तारों में आने वाले विकिरण विचरण करते हैं.

दूसरा होता है इंटरस्टेलर स्पेस जैसे उसका नाम ही है आप समझ ही गए होंगे कि एक तारों के बीच की खाली स्थान को कहा जाता है. इंटरस्टेलर यानी तारों के बीच यह बहुत ही ज्यादा बडा स्पेस.

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ऐसा भी कहा जा सकता है कि एक गैलेक्सी के अंदर जितने भी सारे ग्रह तारे मौजूद होते हैं, उन सभी को छोड़कर जो भी स्पेस बचता बचता है उसे इंटरस्टेलर स्पेस का होता है.

ठीक उसी तरह इंटरगैलेक्टिक स्पेस भी होता है जैसे इसका नाम है आप समझ गए होंगे कि यह गैलेक्सी के बीच के खाली स्थान को कहा जाता है. यह सबसे बड़ा स्पेस होता है इन दो इन स्थानों के बीच में ही गैलेक्सी के प्रकाश पुंज ट्रेवल करते हैं.

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