तमिलनाडु का नृत्य कौन सा है? भरतनाट्यम की जानकारी
तमिलनाडु का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम है। यह भारत के सबसे प्राचीन और लोकप्रिय शास्त्रीय नृत्यों में से एक है।
एक नज़र में
| तमिलनाडु का प्रमुख नृत्य? | भरतनाट्यम। |
| भरतनाट्यम का आधार ग्रंथ? | नाट्यशास्त्र। |
| कथकली किस राज्य का नृत्य है? | केरल। |
मुख्य बातें
- भरतनाट्यम की जड़ें भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से जुड़ी बताई जाती हैं।
- इसमें हस्त मुद्राएँ, चेहरे के भाव (अभिनय) और पैरों की ताल, जिसे अडवु कहते हैं, महत्वपूर्ण हैं।
- संगीत नाटक अकादमी इन आठ नृत्यों को शास्त्रीय मानती है; सत्त्रिया को 2000 में जोड़ा गया।
- भरतनाट्यम की प्रसिद्ध नृत्यांगनाओं में रुक्मिणी देवी अरुंडेल, यामिनी कृष्णमूर्ति, पद्मा सुब्रह्मण्यम और सोनल मानसिंह (ओडिसी भी) शामिल हैं।
- भरतनाट्यम सीखने के लिए बचपन से अभ्यास आदर्श माना जाता है, पर वयस्क भी सीख सकते हैं।
भरतनाट्यम का इतिहास
भरतनाट्यम की जड़ें भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से जुड़ी बताई जाती हैं। इसे पहले मंदिरों में देवदासियों द्वारा "दासी अट्टम" या "सदिर" के रूप में प्रस्तुत किया जाता था। 20वीं सदी में रुक्मिणी देवी अरुंडेल और ई. कृष्ण अय्यर जैसे कलाकारों ने इसे पुनर्जीवित और लोकप्रिय बनाया।
विशेषताएँ
इसमें हस्त मुद्राएँ, चेहरे के भाव (अभिनय) और पैरों की ताल, जिसे अडवु कहते हैं, महत्वपूर्ण हैं। नर्तकी रेशमी साड़ी, गहने, घुँघरू और मेकअप के साथ प्रस्तुति करती हैं। संगत में कर्नाटक संगीत, मृदंगम और वायलिन बजते हैं।
भारत के शास्त्रीय नृत्य
| नृत्य | राज्य |
|---|---|
| भरतनाट्यम | तमिलनाडु |
| कथकली | केरल |
| कुचिपुड़ी | आंध्र प्रदेश |
| ओडिसी | ओडिशा |
| मणिपुरी | मणिपुर |
| कथक | उत्तर भारत |
| मोहिनीअट्टम | केरल |
| सत्त्रिया | असम |
संगीत नाटक अकादमी इन आठ नृत्यों को शास्त्रीय मानती है; सत्त्रिया को 2000 में जोड़ा गया।
प्रसिद्ध कलाकार
भरतनाट्यम की प्रसिद्ध नृत्यांगनाओं में रुक्मिणी देवी अरुंडेल, यामिनी कृष्णमूर्ति, पद्मा सुब्रह्मण्यम और सोनल मानसिंह (ओडिसी भी) शामिल हैं।
भरतनाट्यम सीखने की जानकारी
भरतनाट्यम सीखने के लिए बचपन से अभ्यास आदर्श माना जाता है, पर वयस्क भी सीख सकते हैं। पहला चरण अडवु (बुनियादी चाल) सीखना है, फिर हस्त मुद्राएँ और अभिनय। पहली एकल प्रस्तुति को अरंगेट्रम कहते हैं, जो नर्तकी के प्रशिक्षण के पूर्ण होने का प्रतीक है और बहुत महत्वपूर्ण पारंपरिक अवसर होता है।
भरतनाट्यम के नाम का एक अर्थ है: "भा" (भाव), "र" (राग), "त" (ताल) और "नाट्यम" (नृत्य-नाटक)। यह नृत्य कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के साथ प्रस्तुत होता है। देश में चेन्नई की कलाक्षेत्र संस्था इस नृत्य की शिक्षा के लिए जानी जाती है।
तमिलनाडु के अन्य लोक नृत्य
- करगट्टम: सिर पर घड़े लेकर किया जाने वाला नृत्य
- मयिलट्टम: मोर की वेशभूषा में नृत्य
- ओयिलाट्टम: समूह नृत्य, रुमाल के साथ
- काविड़ी आट्टम: मुरुगन देव की पूजा से जुड़ा
- पोइक्कल कुदिरै: नकली घोड़े के साथ नृत्य
- थेरुकूथू: लोक नाट्य
भरतनाट्यम के अलावा तमिलनाडु में कई ग्रामीण लोक नृत्य प्रचलित हैं, जो त्योहारों, मेलों और धार्मिक अवसरों पर किए जाते हैं।
इस विषय को पढ़ाई में कैसे उपयोग करें
"तमिलनाडु का नृत्य कौन सा है? भरतनाट्यम की जानकारी" जैसे विषय सामान्य ज्ञान और विज्ञान की परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। पढ़ते समय मुख्य तथ्यों (नाम, संख्या, स्थान और वर्ष) को अलग से नोट कर लें और हर कुछ दिन में दोहराएँ। संख्याओं के आँकड़ों में स्रोत के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए परीक्षा से पहले अपनी पाठ्यपुस्तक या आधिकारिक स्रोत से मिलान कर लें। अभ्यास के लिए विद्युदभि के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और मॉक टेस्ट हल करें, ताकि तथ्य याद रहें और समय प्रबंधन भी सुधरे।
- तमिलनाडु का प्रमुख नृत्य?
- भरतनाट्यम का आधार ग्रंथ?
- कथकली किस राज्य का नृत्य है?
ऊपर दिए प्रश्नों के उत्तर पहले बिना देखे लिखने की कोशिश करें, फिर "एक नज़र में" सारणी से मिलान करें। इस तरह सक्रिय स्मरण (एक्टिव रिकॉल) से याददाश्त ज़्यादा मज़बूत होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तमिलनाडु का प्रमुख नृत्य?
भरतनाट्यम।
भरतनाट्यम का आधार ग्रंथ?
नाट्यशास्त्र।
कथकली किस राज्य का नृत्य है?
केरल।
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