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छींक आने के पीछे के कारण जानकर आप चौक जायेंगे

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सर्दियों के मौसम में जब तापमान बहुत ज्यादा कम होता है, तब आप ध्यान दिए होंगे कि लोगों को सर्दी जुकाम की समस्या बहुत ज्यादा होती है और इस मौसम में लोगों को छींक भी बहुत ज्यादा आती है. कुछ लोग यह भी समझते हैं कि जब लोगों को ठंड लगती है तब वह छींकते हैं. कुछ लोगों को किसी खास तरह के भोजन या किसी भी खास तरह के चीज से एलर्जी होती है तब भी वह छींकते हैं. लेकिन आपको क्या पता है की छींक आने का मतलब केवल इतना ही नहीं होता है और और छींक आना हमारे शरीर के लिए कितना ज्यादा आवश्यक है यह आप जानकर निश्चित ही चौक जाएंगे. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि छींक क्यों आती है।

क्या होती हैं छींक

छींक एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें फेफड़ों से हवा नाक और मुंह के मार्ग से बहुत तेजी से बाहर निकलती है. जो कि हमारे मस्तिष्क द्वारा दिए हुए सिग्नल के कारण से होता है.

क्या हैं छींक के पीछे का कारण

जब भी हमारे नाक में कोई बाहरी धूल कण घुस जाता है तो हमारे नाक की त्वचा मैं कुछ सेंसेशन होता है जोकि छोटे-छोटे नर्व सेल से जुड़ा रहता है. यह नर्व सेल्स हमारे ब्रेन से जुड़े रहते हैं और इस कारण से हमारे नाक में धूल कण जा घुसा है यह बात हमारे मस्तिष्क को पता चल जाती है. मस्तिष्क उन कणों को बाहर निकालने के लिए नाक में मौजूद नसों को यह सिग्नल भेजता है कि उन धूल कणों को नाक से बाहर निकालो. फिर शरीर के बाकी के मांस पेशियां जैसे पेट की, छाती की, डायाफ्राम, गले और आंखों की मांसपेशियां यह सभी अंग मिलकर एक साथ काम करते हुए फेफड़ों से हवा को बहुत ही तेजी से बाहर निकालते हैं. और इस तरह नाक में से वह धूल के कण बाहर निकल जाते 

अब शायद ये जानकार आश्चर्य करें कि छींकते वक्त हमारे नाक से हवा 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बाहर निकलती है और इस प्रक्रिया में लगभग एक लाख कीटाणु हवा के जरिए हमारे शरीर से बाहर निकलते हैं.

क्या हमें कभी अपनी छींक को रोकना चाहिए 

तो अब प्रश्न यह है कि हमें छींक क्यों नहीं रोकनी चाहिए. दरअसल जब हम छींकते हैं तो हमारे शरीर से हवा बहुत ही प्रेशर के साथ बाहर निकलती है. जब हम छींक को रोकने का प्रयास करते हैं तो वह प्रेशर हमारे शरीर के अंदर ही शरीर के दूसरे अंगों में ट्रांसफर हो जाती है और संभावना यह रहती है कि यह छींक का प्रेशर हमारे शरीर के बाकी अंगों को बहुत बुरी तरीके से नुकसान पहुंचा दे. सबसे ज्यादा नुकसान हमारे ब्रेन को हो सकता है. कान के पर्दे फट सकते हैं, आंखों की नसें को क्षति पहुंच सकती है. इसके साथ ही वह बैक्टीरिया जो छींक बाहर निकालना चाहता है .वह भी शरीर के अंदर ही रह जाएगा इसलिए छींक को रोकना किसी भी तरह से सही नहीं है.

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