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पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ || how earth was made

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कैसे और कब हुआ पृथ्वी का निर्माण :-

पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ, एक ऐसा प्रश्न जिसका उत्तर केवल आपको earth के निर्माण के बारे में ही नहीं बताएगा, बल्कि काफी हद तक आपको सौरमंडल के निर्माण के बारे में भी बताएगा। इतना ही नहीं आपको अपने सौरमंडल के बाकी के ग्रह और bodies के निर्माण के बारे में भी आपको जानकारी केवल पृथ्वी के निर्माण के बारे में जानने से ही पता चल जाएगा। तो चलिए आज हम यह जानते हैं कि अपनी पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ…

सौरमंडल के निर्माण के साथ ही शुरू हुआ पृथ्वी का निर्माण :-

आज से 4.6 अरब साल पहले धूलकण और गैस के ठंडे बादल जिससे निहारिका (Nebula) कहते हैं। आपस में gravitationally collapse यानी गुरुत्वाकर्षण के कारण आपस में जुड़ कर, इसी Solar Nebula के बीच में सूर्य का निर्माण करते हैं। बिल्कुल उसी तरह जैसे किसी तारे की उत्पत्ति होती है। Solar Nebula के बीच में सूर्य के निर्माण के बाद बचे हुए निहारिकाओं के कण सूर्य के चारों ओर घूमते हुए एक डिस्क का निर्माण कर लेते हैं। इस डिस्क में घूमते हुए छोटे छोटे पार्टिकल ग्रेविटी के कारण आपस में जुड़कर बड़े पार्टिकल बनाने लगते हैं। लेकिन अभी भी कुछ हल्के और बेहद छोटे एलिमेंट जैसे हाइड्रोजन और हीलियम सूर्य के पास वाले क्षेत्र में स्थित रहते हैं। लेकिन solar nebula के बीच में बनी सूर्य द्वारा Solar wind यानी सौर हवा के कारण यह हल्के एलिमेंट सूर्य से थोड़ा दूर चले जाते हैं। लेकिन बहुत ज्यादा दूर नहीं और सूर्य के पास बचते हैं थोड़े भारी और बड़े मटेरियल। यह बड़े मटेरियल आपस में ग्रेविटी द्वारा जुड़ना शुरू हो जाते हैं। जो एलिमेंट्स बहुत ज्यादा भारी होते हैं वह सबसे पहले आपस में जुड़ कर terrestrial planets यानी स्थलीय ग्रह का कोर (core) बनाते हैं। terrestrial planet जैसे शुक्र, earth, मंगल, बुध। जब इन terrestrial planet के कोर बन जाते हैं फिर इस कोर के ऊपर, कोर के मटेरियल से कम भारी के मटेरियल कोर के ऊपर ग्रेविटी के कारण आपस में जुड़ते चले जाते हैं। भारी मटेरियल कोर की तरफ जाते रहते हैं, और हल्के मटेरियल ऊपर आते रहते हैं। और बना लेते हैं crust की लेयर। और इस प्रकार 4 बड़े स्थलीय गोल पिंडो का निर्माण होता हैं।नये नये बने सौरमंडल में छोटे-छोटे पार्टिकल्स इन चार बड़े पिंडो से टकराते गए और बन गए बुध, शुक्र, earth, और मंगल जैसे स्थलीय ग्रह। लेकिन यहां हम धरती के जन्म की बात करेंगे। इसलिए बाकी के ग्रह की उत्पत्ति की बात हम नहीं करते हैं। सीधे पृथ्वी पर ही आते हैं।

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बहुत ही विशेष क्षेत्र में स्थित हैं पृथ्वी :-

अब यहां तक आप पृथ्वी के ढांचे के निर्माण को तो समझ ही गए होंगे। निरंतर पिंडों के टकराव के बाद एक समय ऐसा आया जब धरती से मटेरियल का टकराव बंद हो गया। नई-नई बनी earth काफी गर्म थी। धीरे-धीरे समय बीतने के साथ पृथ्वी ठंडी होनी शुरू हो गई। पृथ्वी ने ग्रेविटी से कुछ गैसेस को अपनी ओर आकर्षित कर धरती के बाहरी लेयर का निर्माण किया। पृथ्वी के क्रस्ट (crust) के नीचे mantle (मैन्टल) की लेयर में टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराव और घर्षण से बड़े बड़े पहाड़ और ज्वालामुखियों का निर्माण हुआ। और इन्हीं ज्वालामुखी से निकलने वाले गैस ने पृथ्वी के वातावरण को बनाया। earth से टकराने वाले ठंडे जमी हुई बर्फ के पिंड और चट्टान ने पृथ्वी की सतह पर पानी के अस्तित्व को लाया। जो कि सौरमंडल के बाहर से आए थे। लेकिन पृथ्वी की सूर्य से दूरी वाला क्षेत्र बेहद विशेष क्षेत्र रहा।जहां heat इतनी संतुलित मात्रा में था, जिससे कि पानी न तो बर्फ की अवस्था में रहा और ना ही भाप की अवस्था में, बल्कि liquid state में रहा। इस विशेष क्षेत्र को जहां पृथ्वी स्थित है उसे Goldilocks zone या habitable zone कहते हैं।

पृथ्वी से टकराया था एक ग्रह :-

ऐसा माना जाता है कि शुरुआती दिनों में पृथ्वी से मंगल के आकार का एक ग्रह टकराया था। जिसका नाम thiea (थिया) था। थिया और earth के टकराव से अंतरिक्ष में गए मलबे के इकट्ठा होने से चंद्रमा का निर्माण हुआ। और इसी टकराव से धरती अपने अक्ष पर 23.4 डिग्री तक झुक गया। जिससे पृथ्वी पर मौसम में बदलाव आना शुरू हुआ। तो कुछ ऐसी परिकल्पना की गई है पृथ्वी के निर्माण के बारे में।

ऐसे बने थे गैस दानव :-

शुरुआत में मैंने आपको बताया था कि सौर हवा द्वारा कुछ हल्के मटेरियल सूर्य से बहा लिए गए और इन्हीं हल्के और गैसियस मटेरियल के इकट्ठा होने से गैस दानव (gas giant) या जोवियन प्लैनेट्स (jovian planet) जैसे बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून जैसे प्लैनेट्स का निर्माण हुआ।

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